महाकाल का वह रूप जिससे स्वयं काल भी भयभीत है

जब समय भी काँप उठता है, वही हैं महाकाल
संसार में सबसे शक्तिशाली यदि कुछ माना गया है, तो वह है काल। काल जो राजा और रंक में भेद नहीं करता। काल जो देवताओं, असुरों और मनुष्यों सभी को एक दिन अपने अधीन कर लेता है। लेकिन सनातन धर्म कहता है काल भी अंतिम नहीं है। काल से भी ऊपर एक सत्ता है, एक ऐसी शक्ति, जिसके सामने स्वयं समय भी नतमस्तक हो जाता है। उसी शक्ति का नाम है
महाकाल
महाकाल कोई साधारण देवता नहीं, महाकाल स्वयं शिव का वह रूप हैं जिससे मृत्यु भी डरती है और समय भी काँपता है।
महाकाल का अर्थ क्या है?
संस्कृत में—
काल = समय, मृत्यु, विनाश
महा = महान, उससे परे, सर्वोच्च
महाकाल का अर्थ है— “काल से भी महान”
अर्थात:
जो समय को जन्म देता है
जो समय को चलाता है
और जो समय को समाप्त भी कर सकता है
काल सबको खा जाता है,
पर महाकाल काल को भी खा जाता है।
काल क्या है और उससे सब क्यों डरते हैं?
काल केवल घड़ी में चलने वाला समय नहीं है।
काल का अर्थ है—
जन्म, परिवर्तन ,वृद्धावस्था ,रोग ,और अंततः मृत्यु ,हर वस्तु काल के अधीन है: ,शरीर ,विचार ,सत्ता ,ब्रह्मांड ,यहाँ तक कि: ब्रह्मा सृष्टि करते हैं, पर काल के अधीन विष्णु पालन करते हैं, पर काल से बंधे
यम मृत्यु देते हैं, पर स्वयं काल के सेवक हैं
लेकिन शिव…
शिव काल के अधीन नहीं हैं।
महाकाल और शिव: क्या अंतर है?
बहुत लोग पूछते हैं—
“क्या महाकाल और शिव अलग हैं?”
उत्तर है— नहीं।
शिव ही महाकाल हैं, पर जब शिव काल के स्वामी बनते हैं, तब वे महाकाल कहलाते हैं।
शिव = चेतना
महाकाल = चेतना + समय पर नियंत्रण
वह रूप जिससे स्वयं काल भी डरता है
शास्त्रों में वर्णन है कि जब सृष्टि का अंत होता है, जब सब कुछ नष्ट हो जाता है, जब ब्रह्मा और विष्णु भी लीन हो जाते हैं,
तब भी जो शेष रहते हैं—
वही हैं महाकाल
उस समय: न दिन होता है न रात न दिशा न आकाश केवल एक अनंत चेतना होती है महाकाल।
महाकाल का उग्र स्वरूप
महाकाल का स्वरूप सामान्य शिव से भिन्न है:
शरीर पर भस्म
जटाओं में गंगा और चंद्र
त्रिनेत्र से विनाश की दृष्टि
कंठ में काल का प्रतीक— सर्प
हाथ में त्रिशूल, जो तीन कालों को दर्शाता है
भूत
वर्तमान
भविष्य
महाकाल सुंदर दिखने के लिए नहीं हैं, महाकाल सत्य दिखाने के लिए हैं।
कालभैरव: जब मृत्यु भी कांपती है
महाकाल का सबसे उग्र अंश है—
कालभैरव
कालभैरव:
समय के रक्षक हैं
पाप और अहंकार के संहारक हैं
तंत्र और रहस्य के अधिपति हैं
कहा जाता है—
कालभैरव के बिना काशी भी अधूरी है।
यमराज भी:
आत्मा लेने से पहले
कालभैरव की अनुमति के बिना
एक कदम आगे नहीं बढ़ा सकते।
उज्जैन के महाकालेश्वर: क्यों सबसे अलग?
12 ज्योतिर्लिंगों में:
महाकालेश्वर एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है
दक्षिण:
मृत्यु की दिशा मानी जाती है
अर्थात:
महाकाल स्वयं मृत्यु की ओर मुख करके खड़े हैं।
भस्म आरती का रहस्य
भस्म = शरीर की नश्वरता
प्रतिदिन मृत्यु का स्मरण
अहंकार का अंत
महाकाल का भक्त:
मृत्यु से नहीं डरता
क्योंकि वह सत्य को जान चुका होता है
पुराणों में महाकाल का वर्णन
शिव पुराण
महाकाल ही सृष्टि के प्रारंभ और अंत हैं
स्कंद पुराण
काल स्वयं महाकाल के आदेश से चलता है
लिंग पुराण
जो महाकाल को जान लेता है, वह पुनर्जन्म से मुक्त हो जाता है
विज्ञान की दृष्टि से महाकाल
विज्ञान कहता है:
समय स्थिर नहीं है
समय गति के साथ बदलता है
समय एक आयाम (Dimension) है
आधुनिक भौतिकी में:
Time Dilation
Space-Time Continuum
Observer Effect
दर्शन कहता है:
जो समय को देख रहा है,
वह समय से ऊपर है।
महाकाल =
Observer of Time
महाकाल की भक्ति का प्रभाव
जो महाकाल को मानता है:
वह मृत्यु से नहीं डरता
वह जीवन को गहराई से समझता है
वह मोह, भय और आसक्ति से मुक्त होता है
महाकाल की भक्ति:
डर पैदा नहीं करती
डर को समाप्त कर देती है
लोगों के पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1. क्या महाकाल मृत्यु के देवता हैं?
नहीं
वे मृत्यु के स्वामी हैं।
Q2. क्या महाकाल की पूजा खतरनाक है?
नहीं
यह आत्मज्ञान की पूजा है।
Q3. क्या हर कोई महाकाल की पूजा कर सकता है?
हाँ, सच्चे मन और श्रद्धा से।
Q4. महाकाल किसे सबसे जल्दी स्वीकार करते हैं?
जो अहंकार छोड़ देता है।
महाकाल का संदेश
“जो समय से डरता है, वह बंधा है।
जो महाकाल को जान लेता है, वह मुक्त है।”
महाकाल मृत्यु नहीं देते,
महाकाल मुक्ति देते हैं।
महाकाल कोई डरावना देव नहीं,महाकाल वह सत्य हैंजो जीवन और मृत्यु दोनों के पार है।जहाँ काल समाप्त होता है,वहीं से महाकाल आरंभ होते हैं।
