क्या भगवान शिव शराब पीते थे? सच्चाई क्या है?

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क्या भगवान शिव शराब पीते थे? सच्चाई क्या है?

“ध्यान लगाने वाले भगवान शिव का दिव्य चित्र, हिमालय पृष्ठभूमि के साथ”
“भगवान शिव – योग, संयम और तपस्या के स्वरूप”https://bhakti.org.in/shiv-nashaa-myth/

 

हिंदू धर्म में भगवान शिव को भोलेनाथ, आशुतोष, महादेव, आदियोगी व त्रिनेत्रधारी के रूप में जाना जाता है। वे जितने सरल हैं, उतने ही गहन और रहस्यमयी भी। समय-समय पर लोगों के मन में कई सवाल उठते हैं, जिनमें से एक सबसे अधिक चर्चित प्रश्न है

क्या भगवान शिव शराब पीते थे?”

आज हम इसी प्रश्न की धार्मिक, आध्यात्मिक और पौराणिक दृष्टि से गहराई में जाकर सच्चाई को समझेंगे—बिना किसी भ्रम, अफवाह या गलत व्याख्या के।

 भगवान शिव और शराब का उल्लेख कहाँ से आया?

अगर हम शिव से जुड़े चित्र, लोककथाएँ और तांत्रिक परंपराओं को देखें, तो कुछ जगहों पर यह वर्णन मिलता है कि कुछ साधक शिव की पूजा में मद्य (शराब) का प्रयोग करते थे।
लेकिन इसका अर्थ यह कभी नहीं कि भगवान शिव स्वयं मानवों की तरह शराब पीते थे।

बल्कि

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“भगवान शिव – योग, संयम और तपस्या के स्वरूप”

 शराब = एक प्रतीकात्मक तत्व था

कुछ तांत्रिक पूजा-पद्धतियों में पाँच तत्वों को ‘पंचमकार’ कहा गया।
उनमें ‘मद्य’ भी शामिल था, लेकिन यह साधक की मनोवृत्ति, वैराग्य, अहंकार त्याग और इंद्रियों पर नियंत्रण का प्रतीक था।

भगवान शिव स्वयं इन सभी विषयों से परे हैं। वे निर्गुण, निराकार और अपरिमेय योगी हैं।

सोमवार के व्रत, अभिषेक और शास्त्र क्या कहते हैं?

महादेव के अभिषेक में इन वस्तुओं का प्रयोग होता है—

जल

दूध

दही

घी

गंगाजल

शहद

बिल्व पत्र

कहीं भी शराब को अनिवार्य, शुभ या आवश्यक नहीं माना गया।यजुर्वेद, शिव पुराण, स्कंद पुराण, पद्म पुराण, और लिंग महापुराण तक किसी में भी यह नहीं लिखा कि भगवान शिव शराब पीते थे।

भगवान शिव का वास्तविक स्वरूप: योगी, तैलंग और तपस्वी

भगवान शिव

आदियोगी (पहले योग गुरु)

ध्यानस्थ महामुनि

भस्मवेषधारी

कैलाशवासी

योग, ध्यान और समाधि के अधिपति ऐसे महायोगी का मदिरापान करना शास्त्रीय रूप से असंभव है।एक व्यक्ति जिस अवस्था में होता है, उससे उसके कार्य तय होते हैं।
शिव की अवस्था है —“समाधि, ध्यान, नियंत्रण, चैतन्य”न कि मद्य, विकार या इंद्रियभोग।

 फिर क्यों कुछ लोग मानते हैं कि शिव शराब पीते थे?

यह भ्रम 3 कारणों से पैदा हुआ—

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“भगवान शिव – योग, संयम और तपस्या के स्वरूप”

 कारण 1: तांत्रिक परंपरा का गलत अर्थ निकालना

कुछ तांत्रिक साधक पूजा में पाँच तत्वों का प्रतीकात्मक उपयोग करते थे मांस, मद्य, मत्स्य, मुद्रा, मैथुन इन्हें प्रतीकात्मक आत्मसंयम व मन की साधना माना गया। लेकिन इनका संबंध भगवान शिव से नहीं बल्कि साधक की साधना से था।

 कारण 2: लोक परंपरा की गलत प्रस्तुति

ग्राम्य कथाओं, लोकगीतों, मंदिरों की कथाओं में कई बातें कहानी के रूप में कह दी जाती हैं ताकि आम व्यक्ति को कोई गूढ़ तत्व समझाया जा सके।इसी से भ्रम बढ़ा कि ‘शिव शराब पीते थे’।जबकि यह केवल कथानक की सीमित शैली है, धार्मिक तथ्य नहीं।

 कारण 3: सोशल मीडिया के मिथक

आजकल कई लोग बिना तथ्य जाँच के वीडियो व पोस्ट बना देते हैं।इससे गलत धारणा बनती है।

क्या शिव को ‘भूतों के स्वामी’ कहना शराब से जोड़ता है? नहीं!

“भूतनाथ”, “अघोर”, “डमरूधर” आदि नामों का अर्थ है कि भगवान—

नकारात्मक शक्तियों पर नियंत्रण रखते हैं

भय, तमस और अज्ञान को दूर करते हैं

अघोर भावना = सब में समान ब्रह्म का दर्शन

इसका शराब से कोई संबंध नहीं।

 शिव की भक्ति में शराब क्यों निषिद्ध मानी जाती है?

शिव भक्ति में पवित्रता, मन-नियंत्रण और सत्वगुण का होना आवश्यक है।

इसलिए

शराब मन को चंचल करती है

नियंत्रण कम करती है

साधना को कमजोर करती है

इसी कारण अधिकांश शिव मंदिरों में शराब ले जाना वर्जित है।

 भगवान शिव ‘विषपान’ करते हैं, शराब नहीं

समुद्र मंथन के समय भगवान शिव ने—

हलाहल विष पिया था,

जो ब्रह्मांड को नष्ट कर सकता था।यह त्याग, करुणा और लोकहित का उदाहरण है।यह शराब पीने जैसा किसी भी प्रकार से नहीं है।

 भगवान शिव के प्रतीक जिन्हें लोग शराब समझ लेते हैं

 धतूरा और भाँग

कुछ लोग भाँग या धतूरा को नशा मानकर सोचते हैं कि शिव नशा करते थे।जबकि ये औषधीय पौधे हैं जो तांत्रिक साधना में मन को स्थिर करने के लिए प्रयोग होते थे।ये शिव द्वारा सेवन किए जाने का वर्णन शास्त्रों में कहीं नहीं

 शिव की भस्म व त्रिपुंड का अर्थ

यह संस्कार और वैराग्य का प्रतीक है।

 वास्तविक उत्तर: भगवान शिव शराब नहीं पीते थे

शास्त्र, वेद, उपनिषद, पुराण कहीं भी ऐसा उल्लेख नहीं मिलता कि महादेव शराब पीते थे।

सच यह है

 शिव हमेशा ही

संयम

योग

ध्यान

समाधि

परमज्ञान

शिवत्व

इन सबके स्रोत हैं।शराब से उनका संबंध केवल कथाओं में उत्पन्न भ्रम है।

  शिव आत्मसंयम के देवता हैं, मदिरा के नहीं

भगवान शिव अनंत के देवता हैं।वे नशा नहीं, बल्कि सचेतना का मार्ग दिखाते हैं।वे ताप, तपस्या और ज्ञान के प्रतीक हैं।इसलिए“भगवान शिव शराब पीते थे” यह कथन पूर्णतः गलत, आधारहीन और शास्त्र-विरुद्ध है।

लोगों द्वारा सबसे ज़्यादा पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. क्या किसी भी पुराण में लिखा है कि शिव शराब पीते थे?

नहीं। किसी भी पुराण, वेद या शास्त्र में ऐसा नहीं लिखा।

Q2. तांत्रिक साधनाओं में मद्य का प्रयोग क्यों था?

यह साधक की मानसिक परीक्षा के लिए था, शिव के लिए नहीं।

Q3. शिव की पूजा में शराब क्यों चढ़ाई जाती है (कुछ स्थानों पर)?

कुछ जनजातीय/लोक परंपराओं में प्रथा है, लेकिन यह शास्त्रीय रूप से स्वीकार्य नहीं

Q4. शिव को भाँग/धतूरा क्यों चढ़ाया जाता है?

ये औषधीय पौधे हैं जिन्हें ‘मन को केंद्रित करने’ का प्रतीक माना गया।

Q5. शिव ने विष क्यों पिया लेकिन शराब नहीं?

क्योंकि विष लोकहित के लिए था।शराब इंद्रियभोग है, जो शिव के स्वभाव के विपरीत है।

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