मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है? जानिए इसका धार्मिक, पौराणिक और वैज्ञानिक महत्व

भारत में मनाए जाने वाले पर्व केवल उत्सव नहीं होते, बल्कि वे प्रकृति, खगोल विज्ञान, अध्यात्म और जीवन दर्शन से गहराई से जुड़े होते हैं। ऐसा ही एक अत्यंत पावन और वैज्ञानिक पर्व है मकर संक्रांति। यह पर्व हर वर्ष 14 या 15 जनवरी को मनाया जाता है और इसे भारत के उन गिने-चुने त्योहारों में माना जाता है जो सूर्य की वास्तविक खगोलीय स्थिति पर आधारित हैं।
मकर संक्रांति केवल तिल और गुड़ खाने या पतंग उड़ाने का पर्व नहीं है, बल्कि यह अंधकार से प्रकाश, अज्ञान से ज्ञान और नकारात्मकता से सकारात्मकता की ओर बढ़ने का प्रतीक है।
मकर संक्रांति का शाब्दिक अर्थ
“मकर” का अर्थ है मकर राशि (Capricorn) “संक्रांति” का अर्थ है परिवर्तन या संक्रमणजब सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तब इस दिन को मकर संक्रांति कहा जाता है। यह वह समय होता है जब सूर्य की चाल दक्षिणायन से उत्तरायण हो जाती है।
मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व
सूर्य देव की उपासना का पर्व
हिंदू धर्म में सूर्य को प्रत्यक्ष देवता माना गया है। मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव की विशेष पूजा की जाती है क्योंकि इस दिन से उनका तेज और प्रभाव बढ़ने लगता है।
मान्यता है:
“मकर संक्रांति के दिन किया गया दान सौ गुना फल देता है।”
गंगा स्नान का महत्व
इस दिन गंगा, यमुना, गोदावरी और संगम में स्नान का विशेष महत्व है। प्रयागराज, हरिद्वार और गंगासागर में महास्नान होता है।
पुराणों के अनुसार
मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान करने से:
पाप नष्ट होते हैं
पूर्वजों को तृप्ति मिलती है
मोक्ष की प्राप्ति होती है

दान-पुण्य का पर्व
इस दिन:
तिल
गुड़
कंबल
अन्न
वस्त्र
का दान अत्यंत शुभ माना गया है। तिल दान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि तिल को पाप नाशक माना गया है।
पौराणिक कथाएँ जो मकर संक्रांति से जुड़ी हैं
भगवान सूर्य और शनि देव की कथा
मकर राशि के स्वामी हैं शनि देव, जो सूर्य देव के पुत्र हैं। मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि के घर प्रवेश करते हैं। यह दिन पिता-पुत्र के संबंधों में सुधार और अहंकार त्यागने का संदेश देता है।
भीष्म पितामह और उत्तरायण
महाभारत में वर्णित है कि भीष्म पितामह ने अपनी मृत्यु मकर संक्रांति के बाद उत्तरायण में ही चुनी। इससे यह विश्वास बना कि उत्तरायण में मृत्यु मोक्षदायक होती है।
मकर संक्रांति का वैज्ञानिक महत्व
सूर्य की ऊर्जा में वृद्धि
मकर संक्रांति के बाद:
दिन बड़े होने लगते हैं
रातें छोटी होती हैं
सूर्य की किरणें सीधी और शक्तिशाली होती हैं
इससे:
शरीर में विटामिन-D बढ़ता है
रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है
तिल और गुड़ खाने का विज्ञान
सर्दी के मौसम में: तिल शरीर को गर्मी देता है गुड़ पाचन सुधारता है इसलिए कहा जाता है: “तिल गुड़ खाओ, मीठा-मीठा बोलो” यह केवल कहावत नहीं, बल्कि स्वास्थ्य मंत्र है।
पतंग उड़ाने का वैज्ञानिक कारण
पतंग उड़ाने से:
शरीर को धूप मिलती है
फेफड़े मजबूत होते हैं
हाथों और आंखों का समन्वय बढ़ता है
यह एक प्राकृतिक व्यायाम है।

भारत में मकर संक्रांति के विभिन्न नाम
| राज्य | पर्व का नाम |
|---|---|
| उत्तर भारत | मकर संक्रांति |
| तमिलनाडु | पोंगल |
| असम | भोगाली बिहू |
| पंजाब | लोहड़ी |
| गुजरात | उत्तरायण |
| कर्नाटक | सुग्गी |
| बंगाल | पौष संक्रांति |
इससे पता चलता है कि यह पर्व पूरे भारत को जोड़ता है।
आध्यात्मिक संदेश
मकर संक्रांति हमें सिखाती है:
अंधकार छोड़कर प्रकाश की ओर बढ़ो
आलस्य त्यागकर कर्म में लगो
कटु वचन छोड़कर मधुरता अपनाओ
यह पर्व आत्मिक शुद्धि और नए जीवन की शुरुआत का प्रतीक है।
लोगों द्वारा पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
मकर संक्रांति हर साल एक ही दिन क्यों आती है?
क्योंकि यह पर्व सूर्य की खगोलीय स्थिति पर आधारित है, न कि चंद्रमा पर।
मकर संक्रांति पर तिल का महत्व क्यों है?
तिल को शनि और पाप नाशक माना जाता है, और यह सर्दियों में शरीर को ऊर्जा देता है।
क्या मकर संक्रांति केवल हिंदुओं का पर्व है?
नहीं, यह प्रकृति और सूर्य से जुड़ा पर्व है, जिसे विभिन्न संस्कृतियों में अलग-अलग रूप में मनाया जाता है।
मकर संक्रांति केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति, विज्ञान और अध्यात्म का अद्भुत संगम है। यह हमें सिखाती है कि जैसे सूर्य उत्तर की ओर बढ़ता है, वैसे ही हमें भी जीवन में सकारात्मक दिशा चुननी चाहिए।
यदि हम इस पर्व के वास्तविक अर्थ को समझ लें, तो मकर संक्रांति हमारे जीवन को ऊर्जा, स्वास्थ्य और शांति से भर सकती है।