90% भक्त ये गलती करते हैं – इसी वजह से रुक जाती है भगवान शिव की कृपा

क्या आपने कभी सोचा है कि हम रोज़ पूजा करते हैं, व्रत रखते हैं, मंदिर जाते हैं, फिर भी जीवन में कष्ट क्यों आते हैं? क्या भगवान हमसे नाराज़ हैं? या फिर हमसे ही कोई ऐसी गलती हो रही है जो 90% भक्त अनजाने में कर रहे हैं? शास्त्र कहते हैं — भगवान कृपा करने में कभी देर नहीं करते, लेकिन भक्त की गलत सोच कृपा का द्वार बंद कर देती है।आज हम उन्हीं गलतियों के बारे में जानेंगे, जिनकी वजह से भगवान शिव, विष्णु या देवी की कृपा रुक जाती है।
गलती नंबर 1: भगवान को केवल “मांगने की मशीन” समझना
आज ज़्यादातर लोग भगवान के पास तभी जाते हैं जब समस्या आती है। नौकरी चाहिए पैसा चाहिए बीमारी ठीक हो कोर्ट केस जीतना है लेकिन क्या आपने कभी बिना मांगे सिर्फ धन्यवाद कहा?
शिव पुराण में लिखा है “जो केवल मांगता है, वह भक्त नहीं व्यापारी है।” भगवान रिश्ता चाहते हैं, सौदा नहीं।

गलती नंबर 2: पूजा में शुद्धता, लेकिन जीवन में अशुद्धता
बहुत से लोग मंदिर में तो सिर झुका लेते हैं, लेकिन बाहर निकलते ही —झूठ बोलते हैं दूसरों को धोखा देते हैं ग़लत कमाई करते हैं भगवान शिव भोले हैं, मूर्ख नहीं। अगर कर्म ग़लत हैं, तो पूजा सिर्फ दिखावा बन जाती है।
गलती नंबर 3: भगवान को दोष देना
जब कुछ अच्छा होता है — “मेहनत मेरी” जब कुछ बुरा होता है — “भगवान की मर्जी” यह सबसे बड़ी नास्तिकता है। गीता कहती है – “कर्म तुम्हारा है, फल भी तुम्हारा है।” भगवान सिर्फ रास्ता दिखाते हैं, चलना हमें होता है।
गलती नंबर 4: तुलना और ईर्ष्या
“उसको सब मिल गया, मुझे क्यों नहीं?” “वो गलत करके भी खुश है, मैं पूजा करके भी दुखी क्यों?” ईर्ष्या से भरा मन कृपा को रोक देता है।शिव जी कहते हैं — “जो दूसरे के भाग्य से जलता है, वह अपने भाग्य को जला देता है।”

गलती नंबर 5: धैर्य की कमी
आज का भक्त चाहता है —
पूजा आज
फल कल
लेकिन भगवान की टाइमिंग हमसे बेहतर होती है।
बीज आज बोया जाता है
फल समय पर मिलता है
जो भक्त धैर्य खो देता है, वही कृपा से दूर हो जाता है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific View)
विज्ञान भी मानता है कि —सकारात्मक सोच से दिमाग शांत होता है प्रार्थना से तनाव कम होता है धैर्य से निर्णय बेहतर होते हैं जब मन शांत होता है, तब सही अवसर दिखने लगते हैं।
लोग इसे ईश्वर की कृपा कहते हैं — और विज्ञान इसे मेंटल क्लैरिटी। असल में दोनों एक ही हैं।
सही तरीका क्या है?
अगर आप सच में भगवान की कृपा चाहते हैं, तो —
पूजा से पहले आचरण सुधारे
मांगने से पहले धन्यवाद दे
दूसरों की मदद करें
धैर्य रखें
भगवान को याद करें, सिर्फ जरूरत में नहीं
यही सच्ची भक्ति है।
गलती नंबर 5: तुलना और शिकायत
“उसको देखो, गलत करके भी खुश है” “मैं सही होकर भी दुखी क्यों हूँ?” यही सोच कृपा को रोक देती है। हर इंसान की यात्रा अलग कर्म अलग समय अलग भगवान शिव न्याय करते हैं, तुलना नहीं।
गलती नंबर 6: अधीरता (जल्दी फल की चाह)
आज की दुनिया में सब कुछ फास्ट है इंटरनेट, खाना, पैसा… लेकिन ईश्वर फास्ट नहीं, परफेक्ट काम करता है। बीज बोने के अगले दिन फल माँगना मूर्खता है। जो धैर्य खो देता है, वह विश्वास भी खो देता है।
गलती नंबर 7: दिखावे की भक्ति
आज भक्ति भी सोशल मीडिया बन चुकी है मंदिर की फोटो बड़ी माला ऊँची-ऊँची बातें लेकिन — घर में झगड़ाबाहर धोखाअंदर लालचभगवान दिल देखते हैं, डिस्प्ले नहीं।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण: कृपा कैसे काम करती है?
विज्ञान कहता है —प्रार्थना से मन शांत होता है शांत मन सही निर्णय लेता है सही निर्णय से सही परिणाम आता है यानी जिसे हम भगवान की कृपा कहते हैं, विज्ञान उसे मेंटल बैलेंस कहता है।
असल में दोनों एक ही प्रक्रिया के दो नाम हैं।
सही भक्ति क्या है?
सुबह भगवान को याद करनादिन में सही कर्म करना रात को धन्यवाद देना भक्ति का मतलब — भगवान से डरना नहींभगवान से जुड़ना है
सच्चे भक्त की पहचान
सच्चा भक्त कम बोलता है ज़्यादा सहता है किसी को नीचा नहीं दिखाता दुख में भी भगवान को नहीं छोड़ता
भगवान शिव ऐसे ही भक्तों पर जल्दी प्रसन्न होते हैं।
निष्कर्ष
भगवान की कृपा कभी रुकती नहीं,हम खुद दरवाज़ा बंद कर लेते हैं।आज अगर आपने ये गलतियाँ समझ लीं,तो मानिए आज से ही कृपा का द्वार खुल गया।
🙏 “हर हर महादेव” 🙏

