90% भक्तों की यही गलती भगवान की कृपा रोक देती है – जानिए पूरा सत्य

आज के समय में लगभग हर व्यक्ति खुद को भगवान का भक्त मानता है। कोई मंदिर जाता है, कोई व्रत रखता है, कोई पूजा-पाठ करता है, तो कोई सोशल मीडिया पर भक्ति से जुड़े पोस्ट शेयर करता है। लेकिन फिर भी एक सवाल सबके मन में रहता है – “इतनी भक्ति करने के बाद भी जीवन में दुख, रुकावटें और असफलताएँ क्यों हैं? भगवान की कृपा क्यों रुक जाती है?”
सच्चाई यह है कि भगवान कृपा देने में कंजूसी नहीं करते, बल्कि हम भक्त ही अनजाने में ऐसी गलतियाँ कर बैठते हैं, जिनकी वजह से कृपा का प्रवाह रुक जाता है। शास्त्रों, संतों और जीवन के अनुभवों से यह स्पष्ट होता है कि आज लगभग 90% भक्त वही पुरानी, सामान्य लेकिन गंभीर गलतियाँ कर रहे हैं।
यह लेख किसी को दोषी ठहराने के लिए नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और सुधार के लिए है। अगर आपने इन बातों को समझ लिया, तो यकीन मानिए – भगवान की कृपा अपने आप बहने लगेगी।
1. भक्ति को सौदेबाज़ी समझ लेना
सबसे बड़ी गलती यह है कि आज की भक्ति सौदेबाज़ी बन चुकी है। “हे भगवान, ये काम कर दो, मैं चढ़ावा चढ़ाऊँगा।” “अगर मेरी मनोकामना पूरी हो गई तो मैं व्रत रखूँगा।” भक्ति का अर्थ है निःस्वार्थ समर्पण, न कि व्यापार। जब हम भगवान को केवल अपनी इच्छाएँ पूरी करने का साधन बना लेते हैं, तो भक्ति की पवित्रता खत्म हो जाती है। भगवान यह नहीं देखते कि आपने कितना चढ़ावा चढ़ाया, बल्कि यह देखते हैं कि आपका भाव क्या है।
2. केवल कर्मकांड, भाव शून्य भक्ति
90% भक्त पूजा तो करते हैं, लेकिन मन कहीं और भटकता रहता है। हाथ माला जप रहे हैं, दिमाग समस्याओं में उलझा है पूजा के समय मोबाइल पास में रखा है आरती करते हुए जल्दबाज़ी है
ऐसी भक्ति केवल शरीर करता है, आत्मा नहीं। शास्त्र कहते हैं: “भगवान भाव के भूखे हैं, दिखावे के नहीं।” जब भाव नहीं होता, तो पूजा केवल एक आदत बन जाती है, और कृपा रुक जाती है।

3. अहंकार – सबसे बड़ा अवरोध
कई भक्त अनजाने में यह सोचने लगते हैं: “मैं रोज मंदिर जाता हूँ, मैं बड़ा भक्त हूँ।” “मैं इतना दान करता हूँ, भगवान मुझसे खुश ही होंगे।” यहीं से अहंकार जन्म लेता है। अहंकार भगवान और भक्त के बीच दीवार बन जाता है। भगवान को वही प्रिय है जो खुद को शून्य समझता है। रावण, हिरण्यकश्यप और कंस – ये सब बड़े ज्ञानी और शक्तिशाली थे, लेकिन अहंकार ने ही उन्हें भगवान से दूर कर दिया।
4. गलत कर्म करके भक्ति से ढकने की कोशिश
यह बहुत आम गलती है: दूसरों के साथ अन्याय झूठ, छल, ईर्ष्या, द्वेष माता-पिता या स्त्री का अपमान और फिर सोचना कि थोड़ी पूजा से सब माफ हो जाएगा। भगवान कहते हैं – पहले कर्म सुधारे, फिर भक्ति फल देगी। जब तक जीवन में अधर्म चलता रहेगा, तब तक पूजा केवल ढोंग बनकर रह जाएगी।
5. धैर्य की कमी – तुरंत फल की अपेक्षा
आज का भक्त जल्दी में है: आज पूजा की, कल फल चाहिए एक व्रत रखा, तुरंत चमत्कार चाहिए लेकिन भगवान की कृपा समय देखकर आती है, परीक्षा लेकर आती है। बीज आज बोया जाता है, फल समय आने पर मिलता है। जो भक्त बीच में ही निराश हो जाता है, उसकी भक्ति अधूरी रह जाती है।
6. दूसरों की निंदा और तुलना
भक्ति के मार्ग में यह बहुत बड़ी रुकावट है: “वो तो पाखंडी है।” “मुझसे ज्यादा पूजा कौन करता है?” जो व्यक्ति दूसरों की भक्ति पर टिप्पणी करता है, वह खुद की भक्ति खो देता है। भगवान हर किसी से उसके भाव के अनुसार जुड़ते हैं, तुलना से नहीं।

7. संकट में भक्ति, सुख में भूल जाना
अधिकतर लोग भगवान को तभी याद करते हैं जब: बीमारी हो धन की समस्या हो जीवन में दुख आए सुख आते ही भक्ति पीछे छूट जाती है। ऐसी भक्ति मजबूरी की होती है, प्रेम की नहीं। भगवान संकट में पुकारने वालों को भी सुनते हैं, लेकिन स्थायी कृपा उन्हें देते हैं जो हर परिस्थिति में जुड़े रहते हैं।
8. गुरु और शास्त्रों की अवहेलना
आजकल हर कोई खुद को ही ज्ञानी समझने लगा है: बिना समझे श्लोकों की व्याख्या गुरु का अपमान शास्त्रों को पुराना बताना जब मार्गदर्शन नहीं होता, तो भक्ति भटक जाती है। गुरु कृपा के बिना भगवान की कृपा भी अधूरी रहती है।
9. क्षमा और करुणा का अभाव
भगवान करुणा के सागर हैं, लेकिन भक्तों में ही करुणा नहीं होती: छोटी बातों पर नफरत बदला लेने की भावना किसी को माफ न कर पाना जब तक हृदय कठोर रहेगा, कृपा कैसे बहेगी?
10. असली भक्ति क्या है?
असली भक्ति बहुत सरल है: सच्चाई विनम्रता करुणा धैर्य कर्तव्य पालन
जब जीवन भक्ति बन जाता है, तब अलग से भगवान को मनाने की ज़रूरत नहीं पड़ती।
भगवान की कृपा कभी रुकती नहीं, हम ही रास्ता बंद कर लेते हैं।
अगर आप: अहंकार छोड़ दें कर्म सुधार लें भाव से भक्ति करें धैर्य रखें तो यकीन मानिए, आपकी ज़िंदगी में भी वो बदलाव आएगा जिसे लोग चमत्कार कहते हैं। आज से एक सवाल खुद से पूछिए – “क्या मेरी भक्ति दिखावे की है या सच्चे हृदय से?” जैसे ही यह सवाल ईमानदारी से हल होगा, भगवान की कृपा अपने आप बहने लगेगी। 🔱
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